Wednesday, 3 February 2010

Sunday, 13 December 2009

उंहा लौंडिया राजे काटी 

लइका चीकन-चाकन बा
समझ ल हलुआ माखन बा 
बखरी बा दुतल्ला ओकर 
कोला-सहन कुल आपन बा
जएसन चाही ओयसन साटी
उंहा लौंडिया राजे काटी


एमे-ओम़े कैले बा
नोकरी सरकारी पएले बा
पोलियो कोई के जम्मे छु देला
ओकरा के जरिके धईले बा
एतने बदे ऊ तरुआ चाटी
उंहा लौंडिया राजे काटी


एगो लमहर एगो छोट
एगो दुब्बर एगो मोट 
हाथ- गोर भगवान क देहल 
जनि देखस एतना ले खोंट
चलत-फिरत तनि गोंरवे झांति 
उंहा लौंडिया राजे काटी    


माई ना बक्चोच रहत जब
दवईया एगो बूंद पियत तब 
देसवा कहत न लंगरा ओके 
उहो छतिया तान चलत अब 
बौरम बनअ न तुहू खांटी
उंहा लौंडिया राजे काटी .  











Sunday, 8 November 2009

Chilhore

चिल्होर

देखावतिया जबरी चिल्होर
उरि-उरि सगरी अकसवा
उपर कपरा के घोरियावे
भुयिया कबो सुरुज देखावे 
बोलावातबिया सरगे की ओ़र
उरि-उरि सगरी अकसवा 




जबरा जियी अबरा मुई 
केथरी जेकर तागा-सुई 
सिखावात्तिया जिनगी कि कोर
उरि-उरि सगरी अकसवा




उठ जाग थूक पोंछ
नोच-चोथ कोर-बो
जगावातिया देहिया हिलोर
उरि-उरि सगरी अकसवा




मछरी हथवा से ले ले
देहिया सनसनाहट भरी देले 
चिउह्कावातिया कन्हवा बिखोर
उरि-उरि सगरी अकसवा




बैइठ मुंडेरा डेरवावेले
चिचिया-चिचिया अद्कावेले
मनावातिया इतना धिन्धोर
उरि-उरि सगरी अकसवा




- डॉ. ऍम.डी. सिंह
















Monday, 2 November 2009

फिर करता हए मन

आखिरी बार
एक बार और
बार-बार
करता हय मन
देख आऊं
अपना गांव
नगर से दूर
प्रकृति के पास
उरती हुयी धूल
उंगी हुयी घांश
टूटे खपरैल
जर्जेर छपर
गंगा का अतिक्रमर
बैलो की घंटी
ट्रक्टर की भर-भर
घुरिया काकी की चिल्ल-पो
इमिरिति भौजी की
घन-घन
झानू का आखारा
नंग-धरंग
ताल ठोकते
गांव के नवरतन

फिर करता हय मन
मंगरू चाचा की
चुनौटी चुरा लू
महंगू दादा की
हुक्की गुर-गुरा लू
मचान पैर बैठ
चिरिया ऊरा लू

- डॉ. ऍम. डी. सिंह
 






Thursday, 15 October 2009

Happy Dipawali to all Indians.

Tuesday, 22 September 2009